मुहावरे
” उत्तर प्रदेश की शिक्षक परीक्षा के लिए “
- अक्ल के पीछे लट्ठ लिये फिरना – मुर्खतापूर्ण कार्य करना
- अपना खिचड़ी अलग पकाना अलग – अलग रहना किसी को न मानना
- अपना उल्लू सीधा करना – स्वार्थ सिद्ध करना
- अपने मुँह मियाँ मिठू बनना – आत्मप्रशंसा करना ।
- अक्ल के घोड़े दौड़ाना – केवल कल्पनायें करते रहना ।
- आग – पानी साथ रखना – असम्भव कार्य करना
- आधी जान सूखना – अत्यन्त भय लगना
- आपे से बाहर होना – क्रोध से अपने वश में न रहना ।
- आग लगाकर तमाशा देखना – लड़ाई कराकर प्रसन्न होना
- आगे का पैर पीछे पड़ना – विपरीत गति या दिशा में चलना
- आटे – दाल की फिक्र होना – जीविका की चिन्ता करना
- आधा तीतर आधा बटेर – बेमेल चीजों का सम्मिश्रण
- आग लगने पर कुआँ खोदना – पहले से कोई उपाय न करना
- आव देखा न ताव – बिना सोचे विचारे
- आँख मैली करना – दिखावे के लिये बुरी तरह से रोना
- आँखें दिखाना – डराने – धमकाने के लिये रोष भरी दृष्टि से देखना
- आँखों में खून उतरना – अत्यधिक क्रोधित होना
- आग बबूला होना – अत्यधिक क्रोधित होना
- आसमान से गिरकर खजूर पर अटकना – एक मुसीबत से हटकर दूसरी मुसीबत में पड़ना
- आसमान टूटना – विपत्ति आना
- आँख का तारा – अत्यन्त प्रिय
- आटे दाल का भाव मालूम होना – वास्तविकता का ज्ञान होना
- आड़े हाथों लेना – खरी – खोटी सुनाना
- ईंट से ईंट बजाना – हिंसा का करारा जवाब देना ,
- खुलकर लड़ाई करना ईमान बेचना – विश्वास समाप्त करना
- ईद का चाँद होना – कभी – कभी दर्शन देना
- ईंट का जवाब पत्थर से देना – दुष्ट के साथ दुष्टता करना
- इज्जत उतारना – सम्मान को ठेस पहुँचाना
- इतिश्री करना – कर्त्तव्य पूरा करना
- इधर की उधर करना – चुगली करके भड़काना
- ईंट – ईंट बिक जाना – कंगाल हो जाना
- ईमान बेचना – सिद्धान्तों के विरुद्ध काम करना •
- इशारों पर नाचना – किसी की इच्छाओं का तुरन्त पालन करना ।
- उजाला करना – कुल का नाम रोशन करना
- उल्लू बोलना – उजाड़ होना
- उल्टी गंगा बहाना – नियम के विरुद्ध कार्य करना
- उल्टी खोपड़ी होना – उचित के विपरीत आचरण करने वाला
- उड़नछू होना – गायब हो जाना
- उबल पड़ना – एकदम गुस्सा हो जाना
- उखाड़ – पछाड़ करना – त्रुटियों दिखाकर कटुक्तियाँ करना
- उल्टे बाँस बरेली को – विपरीत कार्य करना
- उन्नीस – बीस का अंतर होना – थोड़ा बहुत अंतर होना
- उल्लू बनाना – मूर्ख बनाना
- अँगुली उठाना – दोष दिखाना
- अंगुली पकड़कर पहुंचा पकड़ना – थोड़ा प्राप्त हो जाने पर अधिक पर अधिकार जमाना
- अँगुली पर नचाना – संकेत पर कार्य कराना
- उड़ती चिड़िया के पंख पहचानना – कार्य – व्यापार को देखकर व्यक्तित्व को जान लेना
- ऊंची दुकान फीके पकवान – प्रसिद्ध स्थान की निकृष्ट वस्तु होना
- ऊँट के मुँह में जीरा – बहुत कम मात्रा में कोई वस्तु देना
- उल्लू सीधा करना – किसी को बेवकूफ बनाकर काम निकालना
- एक अनार सौ बीमार – एक वस्तु के लिये बहुत – से व्यक्तियों द्वारा प्रयत्न करना
- एक और एक ग्यारह होना – एकता में शक्ति होना
- एक हाथ से ताली नहीं बजती – झगड़ा एक ओर से नहीं होता
- एक पंथ दो काज – एक प्रयत्न से दो काम हो जाना
- ऐसी – तैसी करना – अपमानित करना / काम खराब करना
- एक की चार लगाना – छोटी बात को बड़ा – चढ़ाकर कहना
- एक ही लकड़ी से हॉकना – अच्छे बुरे की पहचान न करना
- ओखली में सिर देना – जानबूझकर अपने को जोखिम में डालना
- औंधी खोपड़ी – मूर्खता औकात पहचानना –
- सामर्थ्य पहचानना औंधे मुँह गिरना – धोखा खाना
- कन्धे से कन्धा मिलाना – सहयोग देना कच्चा
- चिट्ठा खोलना – गुप्त भेद खोलना
- कमर टूटना – हिम्मत पस्त होना
- कलेजा छलनी होना – कड़ी बात से जी दुःखना
- कलेजा थामना – दुःख सहने के लिये हृदय को कड़ा करना
- कलेजा धक – धक करना – भयभीत करना
- कलेजा निकालकर रख देना – सर्वस्व दे देना
- कलेजा मुँह को आना – अत्यधिक व्याकुल होना
- कलेजे पर पत्थर रखना – धैर्य धारण करना
- कसाई के खूटे से बाँधना – निर्दयी व्यक्ति को
- सौपना काँटों पर लोटना – ईया से जलना
- बेचैन होना कागज काला करना – व्यर्थ ही कुछ लिखना ।
- कागजी घोड़े दौड़ाना – कोरी कागजी कार्यवाही करना
- काठ का उल्लू होना – मूर्ख होना
- कान काटना – मात देना
- बढ़कर होना कान का कच्चा होना – बिना सोचे – विचारे दूसरों की बातों पर विश्वास करना
- कान खड़े होना – सचेत होना
- कान खाना – निरन्तर बाते करके परेशान करना
- कान पर जूं न रेंगना – बार – बार कहने पर भी प्रभाव न होना
- कान भरना – चुगली करना
- काया पलट देना – स्वरूप में परिवर्तन कर देना
- काला अक्षर भैंस बराबर – बिल्कुल अनपद
- कीचड़ उछालना – लाछन लगाना
- कएँ में बाँस डालना – बहुत तलाश करना
- कुत्ते की मौत मरना – बुरी तरह मरना
- कूप – मण्डूक होना – संकुचित विचार वाला होना
- कोल्हू का बैल – अत्यन्त परिश्रमी
- कोढ़ में खाज होना – एक दुःख पर दूसरा दुःख होना
- कलम का धनी – अच्छा लेखक काम तमाम करना
- मार डालना किरकिरा होना – विघ्न पड़ना
- किस्मत फूटना – बुरे दिन आना
- खून का चूँट पीना – बुरी लगने वाली बात सह लेना
- खेत रहना – युद्ध में मारा जाना
- खिचड़ी पकाना – गुप्त मंत्रणा करना
- ख्याली पुलाव पकाना – हवाई किले बनाना
- खाल उधेड़ना – कड़ा दण्ड देना
- खून सवार होना – किसी को मार डालने के लिये उद्यत होना
- खून पीना – तग करना
- खाक छानना – भटकना
- खरी – खोटी सुनाना – फटकारना
- खाक में मिलाना – नष्ट करना
- खून का प्यासा होना – जानी दुश्मन होना
- खून सूख जाना — भयभीत होना
- खून सफेद होना – उत्साह का समाप्त हो जाना , बहुत डर जाना
- खून – पसीना एक करना – कठोर परिश्रम करना
- खेल खिलाना – प्रतिपक्षी को समय देना ।
- गड़े मुर्दे उखाडना – बहुत पुरानी बाल दोहराना
- गागर में सागर भरना – थोड़े शब्दों में अधिक कहना
- गाल बजाना – डींग मारना
- गुड़ गोबर करना – काम बिगाड़ना
- घर का दीपक – घर की शोभा और कल की कीर्ति का बढ़ा
- घर की खेती – सहज में मिलने वाला पदार्थ
- घर फूक तमाशा देखना – क्षणिक आनन्द के लिये बहुत अधिक खर्च करना
- घाट – घाट का पानी पीना अनेक स्थलों का अच्छा – बुरा अनुगम करना / चालाक होना
- घाव पर नमक छिड़कना – दुःखी व्यक्ति के हृदय को और दुख पहुचा ।
- घाव हरा होना भूले दुःख की याद आना
- घी के दीये जलाना – खुशी मनाना
- घोड़े बेचकर सोना – निश्चिन्त होना
- घर में गंगा बहना – अच्छी चीज पास में ही मिल जाना
- घिग्घी बँधना – स्पष्ट बोल न सकना
- घोड़े पर चढ़े आना – उतावली में होन
- घट में बसना – मन में बसना घ
- ड़ी में तोला घड़ी में माशा – किसी बात का निर्णय स्थिरतापूर्वक न दें ।
- पाना घर काटे खाना – घर में कोई न होने से अकेलापन अखरना घाव हरा करना भूले दुख को याद दिलाना
- घर की मुर्गी दाल बराबर – सरलतापूर्वक प्राप्त वस्तु का मूल्य नहीं होता
- घुटने टेकना – अपनी हार – असमर्थता स्वीकार करना
- घूरे के दिन फिरना – किसी कमजोर आदमी के भी अच्छे दिन आना
- घर खीर तो बाहर भी खीर – यदि घर में इज्जत है तो बाहर भी होती है ।
- घोड़े दौड़ाना – अत्यधिक कोशिश करना
- घात लगाना – ताक में रहना
- चैन की बंसी बजाना – सुख से रहना
- चिकना घड़ा – निर्लज्ज
- चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना – डर जाना
- चार चाँद लगना – प्रतिष्ठा बढ़ना
- चिराग लेकर ढूँढना – कठिनाई से मिलना
- चंगुल में फँसना – मीठी – मीठी बातों से वश में करना
- चाँदी का जूता मारना – रिश्वत या घूस देना
- चाँद पर थूकना – भले व्यक्ति पर लांछन लगाना
- छाती भर आना – दिल पसीजना
- छाँह न छूने देना – पास तक न आने देना
- छठी का दूध याद दिलाना – संकट में डाल देना
- छूमन्तर होना – गायब हो जाना
- छक्का – पंजा भूलना – कुछ भी याद न रहना
- छाती ठोंककर – साहस करके
- जबान कैंची की तरह चलना – बढ़ – चढ़कर तीखी बातें करना
- जबान में लगाम न होना – बिना सोचे समझे , बिना लिहाज के बातें करना
- जलती आग में घी डालना – क्रोध भड़काना
- जान में जान आना – चैन मिलना
- जहर का चूंट पीना – कड़ी और कड़वी बात सुनकर भी चुप रहना .
- जिन्दगी के दिन पूरे करना – कठिनाई में समय बिताना
- जी चुराना – किसी काम या परिश्रम से बचने की चेष्टा करना
- जमीन पर पैर न रखना – अकड़कर चलना
- जोड़ – तोड़ करना – उपाय करना
- जली – कटी सुनाना – बुरा – भला कहना
- जूतियाँ चाटना – चापलूसी करना
- जान हथेली पर रखना – जिन्दगी की परवाह किये बिना खतरनाक कारी
- जैसा देश वैसा भेष – किसी स्थान का पहनावा , उस क्षेत्र विशेष अनुरूप होना
- जितने मुँह उतनी बातें – एक ही विषय पर अनेक मत होना
- जी खट्टा होना – विरत होना
- जहर की पुड़िया – झगड़ालू औरत
- जोंक होकर लिपटना – बुरी तरह पीछे पड़ना
- जलती आग में घी डालना – क्रोध को उद्दीप्त करना
- जी भर आना – दुःखी होना
- जहर उगलना – कड़वी बातें करना
- झण्डा गड़ना – विजय
- झकझोर देना – हिला देना , पूर्णतः त्रस्त कर देना
- झाडू फिरना / झाडू फिर जाना – ऐसा अपव्यय या नाश होना कि कछ भी बचा न रहे
- झूमने लगना – आनन्द – विभोर हो जाना
- टूट पड़ना – आक्रमण करना
- टिकट कटाना – किसी एक स्थान से कहीं और चल देना
- टेढ़ी खीर – कठिन काम या बाल
- टकासा जवाब देना – स्पष्ट उत्तर देना
- तलवे चाटना – खुशामद करना
- तिल का ताड़ करना – छोटी – सी बात को बड़ी बनाना
- तीन – तेरह करना – गायब करना
- तितर – बितर करना – तीन – पाँच करना बहाना बनाना , इधर – उधर की बात करना
- थाली का बैंगन होना – पक्ष बदलते रहना
- थूककर चाटना – त्यक्त वस्तु को पुन : ग्रहण करना
- थाह लेना – किसी गुप्त बात का भेद जानना
- दंग रह जाना — आश्चर्यचकित होना
- दाँत खट्टे करना – हरा देना ।
- दाँत पीसकर रह जाना – क्रोध रोक लेना
- दाँतों तले अंगुली दबाना – आश्चर्यचकित होना
- दिन दूनी रात चौगुनी होना – बहुत शीघ्र उन्नति करना
- दाल में काला होना – संदेह होना
- दिन – रात एक करना – चौबीसों घण्टे किसी काम में लगे रहना
- दाँत काटी रोटी – घनिष्ठ मित्रता
- दिल का गुबार निकालना – मन की बात कह देना
- दो दिन का मेहमान – जल्दी मरने वाला
- तकदीर फूट जाना — भाग्यहीन होना
- दम भरना – दावा करना
- दाहिना हाथ – महत्वपूर्ण संबल .₹
- दूध के दाँत न टूटना – ज्ञान व अनुभव न होना
- धूप में बाल सफेद होना – अनुभवहीन होना
- धज्जियाँ उड़ाना – दुर्गति करना ।
- ध्यान टूटना – एकाग्रता भंग होना
- धौंस जमाना – रौब दिखाना
- नंगा कर देना – वास्तविकता प्रकट करना।
- नंगे हाथ – खाली हाथ
- नमक मिर्च लगाना – बढ़ा – चढ़ाकर कहना
- निन्यानवे के फेर में पड़ना – धन संग्रह की चिन्ता में पड़ना
- नौ दो ग्यारह होना – भाग जाना नाच नचाना – मनचाही करना
- नाक – भौं चढ़ाना – असन्तोष प्रकट करना नीला – पीला होना – गुस्सा होना
- नाकों चने चबाना – बहुत तंग होना ।
- नाक में नकेल डालना – वश में करना
- नमक अदा करना – उपकारों का बदला चुकाना
- नाक कटना – इज्जत चली जाना
- नाक का बाल होना – किसी का प्रिय होना
- नाक रगड़ना – विनती करना
- पत्थर की लकीर होना – दृढ़ विश्वास होना
- पहाड़ टूट पड़ना – मुसीबत आना
- पाँचों अंगुली घी में होना – पूर्ण लाभ में होना
- पेट में दाढ़ी होना – चालाक होना
- पीठ में छुरा भोंकना – विश्वासघात करना
- पैरों पर खड़ा होना – स्वावलम्बी होना
- पगड़ी रखना – इज्जत रखना ।
- पेट में चूहे दौड़ना – भूख लगना
- पापड़ बेलना – विषम परिस्थितियों से गुजरना ।
- पीठ पर हाथ रखना – पक्ष मजबूत बनाना
- पाँव तले जमीन खिसकना – घबरा जाना
- पाँव फूंक – फॅक कर रखना – सतर्कता से कार्य करना ।
- पीठ दिखाना – पराजय स्वीकार करना
- पानी में आग लगाना – असम्भव कार्य करना
- फीका लगना – हल्का प्रतीत होना
- फूटी आँखों न भाना – बिल्कुल अच्छा न लगना
- फट पड़ना – एकदम गुस्से में आ जाना
- बाँछे खिलना – अत्यन्त प्रसन्न होना
- बाल बाँका न होना – कुछ भी हानि न होना
- बट्टा लगाना – कलंक लगना बाग – बाग होना – अति प्रसन्न होना
- बच्चों का खेल – सरल काम
- बखिया उधेड़ना – भेद खोलना
- टोपी उछालना – इज्जत से खिलवाड़ करना .
- बायें हाथ का खेल – अति सरल काम
- बात का धनी होना – वचन का पक्का होना
- बेसिर पैर की बात करना ऊल – जुलूल बातें करना ।
- बड़े घर की हवा खाना – जेल जाना
- बेपेंदी का लोटा – दुलमुल , अस्थिर विचारों वाला
- बल्लियों उछलना – बहुत खुश होना ।
- बाजार गर्म होना – काम – धंधा तेज होना
- बरस पड़ना – अति क्रुद्ध होकर डॉटना
- बासी कढ़ी में उबाल आना – उचित समय बीत जाने पर इच्छा होना
- बिल्ली के गले में घण्टी बाँधना – स्वयं को संकट में डालना
- भण्डा फोड़ना – रहस्य खोलना , भेद प्रकट करना
- भविष्य पर आँख होना – आगे का जीवन सुधारने के लिये प्रयत्नशील रहना
- भीगी बिल्ली बनना – डर जाना
- भाड़े का टटू – पैसे लेकर काम करने वाला .
- भाड़ झोंकना – स्वय समय खोना
- भैंस के आगे बीन बजाना – बेसमझ आदमी को उपदेश देना
- भागीरथ प्रयत्न करना – बहुत प्रयास करना
- मन की मन में रह जाना – इच्छाएँ पूरी न होना
- माथे पर शिकन आना – मुखाकृति से अप्रसन्नता व्यक्त होना
- मीठी छुरी चलाना – प्यार से मारना .
- राई का पहाड़ बनाना – बढ़ा – चढ़ाकर कहना
- रातों की नींद हराम होना – चिन्ता , भय , दुःख आदि के कारण रातभर नींद न आना
- रोड़ा अटकाना – बाधा डालना
- रास्ते का काँटा बनना – मार्ग में बाधा डालना
- रीढ़ टूटना – आधारहीन रहना
- रंग बदलना – बदलाव होना
- रोंगटे खड़े होना – भय से रोमांचित हो जाना ।
- रास्ते पर लाना – सुधार करना .
- रो – धोकर दिन काटना – जैसे – तैसे जीवन व्यतीत करना ।
- रंग में भंग होना – खुशी के अवसर पर बुरा होने से खुशी का दुःख में बदल जाना
- रास्ता नापना – चले जाना
- रंग जमाना – धाक जमाना
- लंगोटी बिकवाना – दरिद्र कर देना
- लकीर का फकीर होना – रूढ़िवादी होना
- लेने के देने पड़ना – लाभ के बदले हानि
- लोहे के चने चबाना – कठिनाइयों का सामना करना
- लौ लगाना – प्रेम में मग्न हो जाना / आसक्त हो जाना
- ललाट में लिखा होना – भाग्य में बदा होना
- लंगोटिया यार – बचपन की दोस्ती
- लटू होना – किसी पर रीझना
- ठगा – सा रह जाना — मार डालना ।
- लम्बी तानकरं सोना – निष्क्रिय होकर बैठना .
- लाल – पीला होना – गुस्से में होना
- लल्लो – चप्पो करना – चिकनी – चुपड़ी बातें करना
- लहू के आँसू पीना – दुःख सह लेना
- लुटिया डुबोना – कार्य खराब कर देना
- जान के लाले पड़ना – जान पर संकट आ जाना
- वकालत करना – पक्ष का समर्थन करना ।
- वक्त की आवाज – समय की पुकार .
- शहद लगाकर चाटना – किसी व्यर्थ की वस्तु को सम्भालकर रखना
- शैतान के कान कतरना / काटना – बहुत चालाक होना
- शान में बट्टा लगाना – शान घटना
- शेर की सवारी करना – खतरनाक कार्य करना
- शिकंजा कसना – नियंत्रण और कठोर करना
- सफेद झूठ – सर्वथा असत्य
- साँप को दूध पिलाना – शत्रु पर दया करना
- साँप सूंघना – निष्क्रिय या बेदम हो जाना
- सिर आँखों पर – विनम्रता तथा सम्मानपूर्वक ग्रहण करना
- सिर ऊँचा करना – सम्मान बढ़ाना
- सोने की चिड़िया – बहुत कीमती वस्तु
- सिर उठाना – विरोध करना
- सिर पर भूत सवार होना – धुन लग जाना
- सिर मुंडाते ओले पड़ना – काम शुरू होते ही बाधा आना
- सिर पर हाथ होना – सहारा होना
- सिर झुकाना – पराजय स्वीकार करना
- सिर खपाना – व्यर्थ ही सोचना
- सिर पर कफन बाँधना – बलिदान देने के लिये तैयार होना
- सिर गंजा करना – बुरी तरह पीटना
- सिर पर पाँव रखकर भागना – तुरन्त भाग जाना
- हाथ मलना – अपनी विवशता व्यक्त करना ।
- हाँ में हाँ मिलाना – चापलूसी करना
- हाथ के तोते उड़ना – अचानक किसी अनिष्ट के कारण स्तब्ध रह जाना ।
- हाथ – पाँव फूलना – भय से घबरा जाना
- हाथ पीले करना – विवाह करना
- हाथ को हाथ नहीं सूझना – बहुत अंधेरा होना
- हाथ मलते रह जाना – पश्चाताप होना
- होश ठिकानें होना – अक्ल ठिकाने होना
- होश उड़ जाना – घबरा जाना
- हाथ पर हाथ रखकर बैठना – खाली बैठना
- हाथ धो बैठना – खो बैठना
- हवाई किले बनाना – बड़े – बड़े ख्वाब देखना
- हवा हो जाना — भाग जाना
- हाथ साफ कर जाना – चुरा लेना
- हवा का रुख पहचानना – परिस्थिति को भाँपना
- हथेली पर सरसों बोना – थोड़े समय में कठिन काम करना
- हवा लगना – बुरी संगति का प्रभाव होना
- हक्का – बक्का रह जाना – हैरान रह जाना
- हुक्का पानी बन्द करना – जाति से बाहर करना
- हवा के घोड़े पर सवार होना – शीघ्रता करना
by Alok Verma