डॉ० श्यामसुन्दर दास का जीवन परिचय by आलोक वर्मा

डॉ० श्यामसुन्दर दास

डॉ० श्यामसुन्दर दास हिन्दी साहित्याकाश के ऐसे नक्षत्र हैं , जिन्होंने अपने प्रकाश से साहित्य को उज्ज्वल कर दिया । द्विवेदी युग के विषयों के विवेचन का कार्य सर्वप्रथम बाबू श्यामसुन्दरदास जी ने आरम्भ किया । आपने हिन्दी साहित्य के विकास में अतुलनीय योगदान दिया । आप द्विवेदी युग के श्रेष्ठ निबन्धकार थे ।

डॉ० श्यामसुन्दर दास का जन्म काशी के एक पंजाबी खत्री परिवार में सन् 1875 ई० को हुआ था । आपके पिताजी का नाम श्री देवीदास खन्ना था । आपने प्रयाग विश्वविद्यालय से बी०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की । बी०ए० उत्तीर्ण करने के बाद आपको सेण्ट्रल हिन्दू कॉलेज में अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया । तत्पश्चात् आपकी नियुक्ति लखनऊ के कालीचरण हाईस्कूल में प्रधानाचार्य पद पर हुई । इन्हीं दिनों काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग की स्थापना हुई तथा आपने वहाँ अध्यक्ष का पदभार सँभाला । काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना में आपका सहयोग रहा । हिन्दी भाषा तथा हिन्दी सेवाओं के लिए आपको रायबहादुर , साहित्य वाचस्पति , तथा डी – लिट की उपाधियों से विभूषित किया गया । सन् 1945 ई० में अगस्त मास में आपका देहावसान हुआ ।

बाबू श्यामसुन्दर दास की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं

निबन्ध – हिन्दी का आदिकवि , नीति शिक्षा , चन्दबरदाई , भारतवर्ष की शिल्पशिक्षा , कर्त्तव्य और साधना आदि । इतिहास – हिन्दी साहित्य का इतिहास , कवियों की खोज आदि । अलोचना साहित्यालोचन , भारतेन्दु हरिश्चन्द्र , रूपकरहस्य , गोस्वामी तुलसीदास आदि । पाठ्यपुस्तक संकलन – हिन्दी संग्रह , गद्य – कुसुमावली , भाषा – सार – संग्रह आदि । भाषा – विज्ञान – भाषा रहस्य , भाषा विज्ञान , हिन्दी भाषा का विकास आदि । जीवनी – मेरी आत्म – कहानी । सम्पादन – रामचरितमानस , कबीर – ग्रन्थावली , पृथ्वीराज रासो , संक्षिप्त पद्मावत , मेघदूत , नागरी प्रचारिणी पत्रिका आदि ।

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