डॉ० सम्पूर्णानन्द का जीवन परिचय by आलोक वर्मा

डॉ० सम्पूर्णानन्द

डॉ० सम्पूर्णानन्द गम्भीर एवं उदात्त साहित्य सजन के लिए विख्यात हैं । आप कुशलर सहृदय साहित्यकार , भारतीय संस्कृति के अध्येता एवं दर्शन के प्रकाण्ड विद्वान् थे । डा० सा जी राष्ट्र के प्रति समर्पित सुविख्यात साहित्यिक – मनीषी थे । आप एक उद्भट विद्वान थे डॉ० सम्पूर्णानन्द का जन्म 1 जनवरी , 1890 को काशी में एक संभ्रान्त कायस्थ परिवार में हुआ । था । आपके पिता श्री विजयानन्द बड़े धार्मिक व्यक्ति थे . जिनका आपके ऊपर पूरा प्रभाव पड़ा । आपन क्वीन्स कॉलेज बनारस से बी०एस – सी० की परीक्षा उत्तीर्ण करके प्रयाग ट्रेनिंग कॉलेज से एल०टी० की परीक्षा उत्तीर्ण की । आपने एक अध्यापक के रूप में जीवन में प्रवेश किया और सर्वप्रथम प्रेम महाविद्यालय , वृन्दावन में अध्यापन कार्य किया । कुछ समय पश्चात् आपकी नियुक्ति इंगर कॉलेज , बीकानेर में प्राचार्य के पद पर हुई । सन् 1921 ई० में महात्मा गाँधी के राष्ट्रीय आन्दोलन से प्रेरित होकर आप भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में कूद पड़े । आप अनेक बार जेल भी गए । स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् आप उत्तर प्रदेश के गृहमन्त्री , शिक्षामन्त्री तथा मुख्यमन्त्री भी रहे । इसके उपरान्त सन् 1962 ई० में राजस्थान प्रदेश के राज्यपाल नियुक्त किए गए । इसके बाद 10 जनवरी , 1969 ई० को काशी में ही आपने अपने भौतिक शरीर का परित्याग किया । डॉ० सम्पूर्णानन्द का हिन्दी के प्रति बचपन से ही अनुराग था । आपने उत्कृष्ट रचनाएं लिखकर हिन्दी साहित्य के भण्डार की अभिवृद्धि की । सन् 1940 ई० में आप अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति चुने गए । हिन्दी साहितय सम्मेलन ने ‘ समाजवाद ‘ कृति पर आपको मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्रदान किया था । आपको सम्मेलन की सर्वोच्च उपाधि ‘ साहित्य वाचस्पति से भी सम्मानित किया गया । काशी नागरी प्रचारिणी सभा के आप अध्यक्ष और संरक्षक भी रहे । वाराणसी संस्कृत विश्वविद्यालय आपकी ही देन है ।

डॉ० सम्पूर्णानन्द की प्रसिद्ध कृतियाँ निम्नलिखित हैं

इतिहास – आर्यों का आविदेश , सम्राट हर्षवर्द्धन , काशी का विद्रोह , भारत के देशी राज्य , आदि । राजनीति – चीन की राज्य क्रान्ति , समाजवाद , अन्तर्राष्ट्रीय विधान , मिस्र की राज्य क्रान्ति आदि । जीवनी – देशबन्धु चितरंजनदास , महात्मा गांधी । ज्योतिष – सप्तर्षि – मण्डल । धर्म – गणेश , ब्राह्मण सावधान , नारदीय सूक्ति टीका आदि । निबन्ध – भाषा की शक्ति ।

डॉ० सम्पूर्णानन्द गंभीर विचारक एवं प्रौढ़ लेखक थे । आपकी रचनाओं में आपके व्यक्तित्व और पाण्डित्य की झलक मिलती है । आपने तत्सम शब्दावली से युक्त खड़ी बोली में ही साहित्य सृजन किया । आपकी भाषा गम्भीर , प्रवाहयुक्त तथा सौष्ठव से युक्त है ।

By आलोक वर्मा

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