रामवृक्ष बेनीपुरी का जीवन परिचय by आलोक वर्मा

रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी की गड़ना महान् लेखकों में की जाती है । आपका लिखा गया प्रशस्त करते है । आप बहमुखी प्रतिभा से पकाहा है । समाजसेवी एवं राजनीतिज्ञ के रामवृक्ष बेनीपुरी रामवृक्ष बेनीपुरी की गणना हिन्दी साहित्य के महान लेखकों में की जाती है । आपका प्रत्येक शब्द व वाक्य क्रान्ति के क्षेत्र में एक नवीन मार्ग प्रशस्त कर है । आप बहुमुखा । मण्डित थे । रखाचित्र का महत्वपूर्ण स्थान देने का श्रेय आपको ही है । समाजसेवी एव राज माते आपने जो कुछ लिखा है , वह स्वतन्त्र भाव से लिखा है । रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म बिहार के मुजफ्फरपर जिले के बेनीपर नामक ग्राम में जनवरा , सन 1902 में हुआ था । आपके पिता श्री फूलवन्तसिंह एक साधारण किसान थे । बाल्यावस्था में हा आपके माता – पिता की छत्र – छाया आपके सिर से उठ गई थी तथा आपका लालन – पालन आपकी मौसी ने किया था । आपकी प्रारम्भिक शिक्षा बेनीपर में ही हुई थी बाद में अपनी ननिहाल में भा । पढ़े । मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने से पूर्व ही सन् 1920 में आपने पढ़ाई छोड़ दी और गांधी जी के असहयोग आन्दोलन से प्रभावित होकर स्वतन्त्रता संग्राम में कूद पडे । मात्र अठारह वर्ष की आयु में आप स्वतन्त्रता सैनिक बन गये । स्वाध्याय के बल पर ही आपने हिन्दी साहित्य की ‘ विशारद ‘ परीक्षा उत्तीर्ण की । स्वतन्त्रता के इस महान् पुजारी ने अपने निबन्धों एवं लेखों के द्वारा मनुष्यों के हृदय में देशभक्ति की भावना का संचार किया । आप राष्ट्रसेवा के साथ – साथ साहित्य साधना भी करते रहे । देश – सेवा के परिणामस्वरूप आपको अनेक बार जेल यातनाएँ भी सहन करनी पड़ी । स्वतन्त्रताप्राप्ति के पश्चात् देश में पद और मान पाने की जो होड़ लगी उसे दोकर काफी हृदय विचलित हो उठता था । स्वतन्त्रता और साहितय के इस प्रेमी ने सन् 1968 में चिरनिद्रा को वरण किया । बाल्यावस्था से ही बेनीपुरी जी की साहित्य लेखन में अभिरुचि थी । पन्द्रह वर्ष की अल्पायु से ही आप पत्र – पत्रिकाओं के लिए लिखने लगे थे । पत्रकारिता से ही आपकी साहित्य साधना का श्रीगणेश हुआ था । कारागारवास में भी आपने साहित्य साधना को बनाये रखा । आपने बालक , तरुण भारती . मित्र , किसान , योगी , हिमालय तथा जनता आदि पत्र – पत्रिकाओं का सफल सम्पादन किया । आपने उत्कृष्ट कोटि का साहित्य सृजन किया । आपकी रचनाओं के विषय देशभक्ति , भारतीय संस्कृति तथा समाज – निर्माण हैं । आपके गद्य साहित्य में गहन अनुभूतियों एवं उच्च कल्पनाओं की स्पष्ट झाँकी मिलती है । गद्य साहित्य की उपन्यास , नाटक , कहानी , संस्मरण , निबन्ध , रेखाचित्रों आदि के लिए । आप सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं । आपके सम्पूर्ण साहित्य को ‘ बनीपुरी ग्रन्थावली ‘ के नाम से दस खण्डों में प्रकाशित करने की योजना थी , जिसके दो खण्ड प्रकाशित हो चुके हैं । निबन्धों और रेखाचित्रों के लिए आपको अत्यधिक ख्याति प्राप्त हुई । वस्तुतः आप उत्कृष्ट कोटि के अप्रतिम साहित्यकार थे ।

आपकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित है

रेखाचित्र – माटी की मूरतें , लाल तारा आदि । संस्मरण – जंजीरें और दीवार , तथा मील के पत्थर । निबन्ध – गेहूँ बनाम गुलाब , मशाल आदि । कथा साहित्य – पतितों के देश में ( उपन्यास ) तथा चिता के फूल ( कहानी ) । जीवनी – महाराणा प्रतापसिंह , कार्ल मार्क्स , जयप्रकाश नारायण । नाटक – अम्बपाली , सीता की माँ , रामराज्य आदि । यात्रा वृत्तान्त – पैरों में पंख बाँधकर एवं उड़ते चलें । आलोचना – विद्यापति पदावली एवं सुबोध टीका आपकी आलोचनात्मक कृतियाँ हैं । सम्पादन – तरुण भारती , बालक , युवक , किसान , मित्र , कैदी , योगी , जनता , चुन्नू – मुन्नू , तूफान।

By आलोक वर्मा

Leave a comment