राहल सांकृत्यायन का जीवन परिचय by आलोक वर्मा

राहुल सांकृत्यायन

राहल सांकृत्यायन हिन्दी साहित्य की अद्वितीय विभूति हैं तथा आप हिन्दी कम है । आपका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पन्दढा नामक ग्राम में अपने नाना ५० 1893 ई० में हुआ था । आपके पिता पं० गोवर्द्धन पाण्डे , कनेला ग्राम में रहते थे । वे कट्टर धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे । राहलजी का बचपन का नाम केदारनाथ था । संकृति गोत्र होने के कारण आप सांकृत्यायन कहलाये । बौद्ध धर्म में आस्था होने के कारण आपने अपना नाम बदलकर राहुल रख लिया तथा आप राहल सांकृत्यायन इस नाम से प्रसिद्ध हए । आपकी प्रारम्भिक शिक्षा रानी की सराय और निजामाबाद में हुई । आपने सन् 1907 ई० में उर्दू मिडिल पास की । आपके पिता की तीव्र इच्छा थी कि आप आगे भी पढाई करें परन्त बौद्ध धर्म में आस्था हो जाने के कारण आपका मन अध्ययन से विरत हो गया । आपके नाना सेना में सिपाही रहे थे । उनके मुख से दक्षिण भारत की यात्रा के अनुभव सुन कर आप के मन में घूमने की इच्छा बलवती होती चली गयी । तत्पश्चात् उन्होंने तिब्बत , सम्पूर्ण भारत , एशिया , युरोप सोवियत भूमि और लंका की भूमि पर यात्राएँ करते हुए अपना जीवन बिताया । बाद में धुमक्कड़ों के निर्देशन के लिए आपने ‘ घुमक्कड़ शास्त्र ‘ लिख डाला । आपने कभी विधिवत् शिक्षा ग्रहण नहीं की थी । विद्यालय में तो आपने प्रवेश ही नहीं लिया था । अपने घूमने के अनुभव पर ही आपने अपने साहित्य की सर्जना की तथा हिन्दी की अथक् सेवा करते हुए 14 अप्रैल , सन् 1963 ई० को आपने महाप्रस्थान ( मृत्यु ) किया । राहुलजी को साहित्य लिखने की प्रेरणा , पालि साहित्य और संस्कृत के अध्ययन से ही प्राप्त हुई । आपने पाँच बार तिब्बत , लंका और सोवियत भूमि की यात्रा की थी और बौद्ध साहित्य का अध्ययन किया तथा उस ज्ञान को विभिन्न रचनाओं के माध्यम से व्यक्त किया । वे एशिया और यूरोप की छत्तीस भाषाओं के ज्ञाता थे । आपने कहानी , नाटक , उपन्यास , यात्रावृत्त , निबन्ध , आत्मकथा , जीवनी , साहित्यालोचन , राजनीति और इतिहास आदि विषयों पर लगभग 150 ग्रन्यों की रचना की है

राहुलजी की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं

यात्रा साहित्य – मेरी तिब्बत यात्रा , मेरी यूरोप यात्रा , लंका , मेरी लद्दाख यात्रा , रूस में पच्चीस मास , जापान , ईरान , घुमक्कड़शास्त्र एवं मंगोलिया सम्बन्धी यात्रा वृत्तान्त । कहानी संग्रह – वोल्गा से गंगा ( संग्रह ) , कनैला की कथा , सतमी के बच्चे , बहुरंगी मधुपरी आदि । उपन्यास – जय यौधेय , दिवोदास , सिंह सेनापति , विस्मृत यात्री , मधुर स्वप्न , सप्तसिन्धु आदि । जीवनी – महामानव बुद्ध , कार्ल मार्क्स , लैनिन , स्टालिन , सरदार पृथ्वीसिंह , नये भारत के नये नेता , असहयोग के मेरे साथी , वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली , आदि । आत्मकथा – मेरी जीवन – यात्रा । साहित्यालोचन – हिन्दी काव्यधारा , दक्खिनी हिन्दी धारा । धर्म और दर्शन – बौद्ध दर्शन

By आलोक वर्मा

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