सरदार पूर्णसिंह का जीवन परिचय by आलोक वर्मा

सरदार पूर्णसिंह

सरदार पूर्णसिंह , द्विवेदी युग के श्रेष्ठ तथा सफल निबन्धकार हैं । अध्यापक पूर्णासह हवा साहित्य के प्रचार – प्रसार के अद्वितीय उत्थान के निबन्धकार हैं । उन्होंने भावात्मक एव शैली के निबन्धों की रचना करके इस क्षेत्र में एक नयी परम्परा का सूत्रपात किया । आपन मात्र छः निबन्ध लिखकर ही हिन्दी के निबन्धकारों में अपना उच्चकोटि का स्थान बनाया । आपका जन्म 17 फरवरी , सन् 1881 ई० में ऐबटाबाद ( पंजाब ) जिले के सलहड़ नामक ग्राम में हुआ था । अपनी माता के सात्विक और धर्मपरायण जीवन ने बालक पूर्णसिंह को अति प्रभावित किया । आपकी प्रारम्भिक शिक्षा रावलपिण्डी में हुई । हाईस्कूल करने के बाद आप लाहौर चले गए । लाहौर से इण्टरमीडिएट – परीक्षा उत्तीर्ण करके आप रसायनशास्त्र का विशेष अध्ययन करने हेतु जापान चले गये । वहाँ आपकी भेंट स्वामी रामतीर्थ से हुई । स्वामीजी से प्रभावित होकर आपने संन्यास ले लिया और उन्हीं के साथ भारत लौट आये । बाद में आपने अपनी गृहस्थी भी बसाई और देहरादून के फोरेस्ट इंस्टीट्यूट में नौकरी कर ली । स्थिति अनुकूल न होने के कारण आपने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और ग्वालियर चले आये । ग्वालियर में भी आपका मन नहीं लगा अतः आप पंजाब चले आये , खेती – बाड़ी करने लगे । 31 मार्च , सन् 1931 को मात्र पचास वर्ष की आयु में आप इस संसार से विदा हुए । सरदार पूर्णसिंह की मातृभाषा पंजाबी थी परन्तु राष्ट्र – भाषा हिन्दी से आपको विशेष स्नेह था ; अतः आपने हिन्दी में उच्चकोटि के निबन्धों की रचना की । आपने अपनी मौलिक विचारधारा एवं व्यंजनापूर्ण शैली में केवल छ : निबन्धों की रचना की । निबन्ध लेखन हेतु आपने मुख्य रूप से नैतिक विषयों को ही लिया । आपने जो भी लिखा है वह भाव और अनुभूति की दृष्टि से लिखा है जो सजीव एवं लोकमंगल की भावना से परिपूर्ण है ।

आपकी गद्य रचनाएँ बहुत कम हैं किन्तु अतिविशिष्ट हैं ।

आपके निबन्ध इस प्रकार हैं – ( 1 ) मजदूरी और प्रेम , ( 2 ) आचरण की सभ्यता , ( 3 ) सच्ची वीरता , ( 4 ) अमेरिका का मस्त योगी बॉल्ट हिटमैन , ( 5 ) कन्यादान , तथा ( 6 ) पवित्रता । सरदार पूर्णसिंह की भाषा शुद्ध एवं साहित्यिक खड़ी बोली है । आपके साहित्य में उर्दू – फारसी के शब्दों का प्रयोग प्रचूर मात्रा में हआ है । आपने अपने निबन्धों में विदेशी भाषा के शब्दों का प्रयोग किया है । आपकी भाषा में एक गति है , प्रवाह है , सौन्दर्य है एवं हृदय और मस्तिष्क को बाँध लेने

Leave a comment