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तकनीकी क्या है ? By आलोक वर्मा

तकनीकी क्या है ?

( WHAT IS TECHNOLOGY )

तकनीकी या तकनीकी विज्ञान अंग्रेजी के Technology शब्द का पर्याय है । तकनीकी ‘ का अर्थ है – दैनिक जीवन में वैज्ञानिक ज्ञान का प्रयोग करने की विधियाँ । प्रो० गालब्रेथ ( Golbraith ) के अनुसार , तकनीकी ( Technology ) की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं

( 1 ) Systematic application of scientific or other organized knowledge to practical tasks .

( 2 ) Forming the division and sub – division of any such task into its component parts .

जैकोटा ब्लूमर ( Jacquetta Bloomer ) ने सन् 1973 में तकनीकी की परिभाषा निम्न प्रकार दी – ” Technology is the application of scientific theory to practical ends ” .

अतः यह कहा जा सकता है कि वैज्ञानिक व्यवस्थाओं तथा प्रविधियों का प्रयोगात्मक रूप ही तकनीकी या तकनीकी विज्ञान है । ‘ तकनीकी ‘ शब्द को अधिकतर ‘ मशीन ‘ या ‘ मशीन सम्बन्धी प्रत्ययों से साधारणतः लोग जोड़ते हैं । लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि ‘ तकनीकी ‘ में मशीन या मशीनरी का प्रयोग किया ही जाय । इसका तात्पर्य तो किसी भी प्रयोगात्मक कार्य से है , जिसमें वैज्ञानिक ज्ञान या सिद्धान्तों का प्रयोग किया जाय ।

यह ग्रीक शब्द ‘ Technikos ‘ से निकला है , जिसका अर्थ है – कला । इसका पर्याय लैटिन भाषा का शब्द ‘ Texere ‘ है , जिसका अभिप्राय बुनने तथा निर्माण करने ( Weave or construct ) से होता है । डॉ० दास के अनुसार , “ Any system of interrelated parts which are organized in a scientific manner as to attain some desired objective could be called technology . ”

By Alok Verma

शिक्षा क्या है ? By आलोक वर्मा

शिक्षा क्या है ?

( WHAT IS EDUCATION ? )

शिक्षा की उत्पत्ति ‘ शिक्ष् ‘ धातु से हुई है । इसका अर्थ है – विद्या प्राप्त करना । दूसरे शब्दों में , ज्ञानार्जन या विद्या – प्राप्ति के माध्यम से संस्कारों एवं व्यवहारों का निर्माण करना ही शिक्षा कहलाता है । शिक्षा , लैटिन भाषा के शब्द ” एडूकेटम ‘ ( Educatum ) का पर्याय है , जिसका अंग्रेजी में Education पर्याय शब्द है । इसका अर्थ है – ” शिक्षण की कला ‘ | Universal Dictionary of English Language के अनुसार शिक्षा से तात्पर्य है – ( 1 ) शिक्षित करना , प्रशिक्षण देना , ( 2 ) मस्तिष्क तथा चरित्र का विकास करना , तथा ( 3 ) किसी विशेष राज्य की शिक्षा – व्यवस्था । ये सभी शब्द शिक्षा के विभिन्न अभिप्रायों तथा शैक्षणिक क्रिया – प्रक्रियाओं की ओर संकेत करते हैं । शिक्षा बालक को नये – नये अनुभव प्रदान कर उसे इस योग्य बनाती है कि वह अपने वातावरण में समायोजित होकर अपनी शक्तियों तथा निहित योग्यताओं का पूर्ण विकास कर , योग्यतानुसार अपने परिवार , समाज तथा राष्ट्र को किसी विशिष्ट क्षेत्र में योगदान कर सके ।

शिक्षा से तात्पर्य बालक के व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाना है । शिक्षा से बालक की मूलप्रवृत्तियाँ परिमार्जित होती हैं । मूलप्रवृत्तियों के परिमार्जन में मनोविज्ञान , तकनीकी तथा विज्ञान अपना प्रभावपूर्ण योगदान शिक्षा के क्षेत्र में प्रदान करता है । अतः शिक्षा स्वय में एक आत्मनिर्भर ( Independent ) प्रत्यय नहीं है वरन यह तकनीकी विज्ञान से सम्बन्धित है । तकनीकी विज्ञान बालकों के व्यवहार के अध्ययन में शिक्षा की मदद करता है और साथ ही उनमें परिमार्जन तथा संशोधन के लिये दिशा – निर्देश प्रदान करता है ।

शैक्षिक तकनीकी का अर्थ तथा स्वरूप by आलोक वर्मा

शैक्षिक तकनीकी का अर्थ तथा स्वरूप

( MEANING AND NATURE OF EDUCATIONAL TECHNOLOGY )

‘ एजूकेशनल टेक्नॉलॉजी ‘ ( Educational Technology ) शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – एक , एजूकेशन ‘ और दूसरा , ” टेक्नॉलॉजी ‘ । सर्वप्रथम हम एजूकेशन या शिक्षा का अर्थ देखेंगे , फिर ‘ टेक्नॉलॉजी ‘ का , और इसके आधार पर इस विषय को परिभाषित करने का प्रयत्न करेंगे ।

By आलोक वर्मा

भारत में शैक्षिक तकनीकी by आलोक वर्मा

भारत में शैक्षिक तकनीकी

( EDUCATIONAL TECHNOLOGY IN INDIA )

भारत में शिक्षा के विभिन्न अंगों को सबल और सक्षम बनाने का कार्य राष्ट्रीय शैक्षिक अनसंधान शिक्षण परिषद , नई दिल्ली का है । इस परिषद के अन्तर्गत एक विभाग ‘ शैक्षिक तकनीकी केन्द्र के नाम से कार्यरत है । यह विभाग शोध एवं प्रशिक्षण के साथ – साथ शैक्षिक तकनीकी पर विशिष्ट सामग्री भी विकसित करने में संलग्न है । इस केन्द्र की परामर्शदाता प्रो० स्नेह शुक्ला तथा प्राचार्य श्रीमती विजय मुले आदि रहे हैं । इन लोगों के प्रयासों के फलस्वरूप यह विभाग शैक्षिक तकनीकी चेतना का विकास पूर्ण जोर – शोर के साथ कर रहा है ।

सन् 1960 – 70 के दशकों में अनेक शोध – अध्ययन , सेमीनार सिम्पोजियम आदि ‘ अभिक्रमित अध्ययन के क्षेत्र में किये गये । अनेक विषयों में अभिक्रमित सामग्री विकसित की गयी । इस क्षेत्र में शाह , कलकर्णी . के० पी० पाण्डे , प्रेम प्रकाश , कपाडिया तथा कुलश्रेष्ठ ने काफी कार्य किया । शीक्षक लक्ष्या के क्षेत्र में डॉ० दवे तथा उनका RCEM System उल्लेखनीय है । शैक्षिक नियन्त्रण के क्षेत्र में CASE Baroda , II . T . खड़गपुर , ईविंग क्रिश्चियन कॉलेज , इलाहाबाद तथा NCERT , नई दिल्ली ने काफी कार्य किया ।

क्रियानसंधान के क्षेत्र में डॉ० शेरी , वर्मा , अहलूवालिया , कुलश्रेष्ठ तथा भार्गव आदि के नाम उल्लेखनीय हैं । Micro – Teaching के क्षेत्र में डॉ० एल० सी० सिंह , डॉ० दास , डॉ० पासी , डॉ० जंगीरा तथा डॉ० अजीत सिंह आदि ने काफी कार्य किया है । NCERT ने इस क्षेत्र में इन्दौर यूनीवर्सिटी के साथ कई National Research Projects पूर्ण किये हैं । मिनी टीचिंग तथा इण्टीग्रेशन ऑफ टीचिंग स्किल्स के क्षेत्र में डॉ० एस० पी० कुलश्रेष्ठ तथा डॉ० एन० के० जंगीरा का काफी कार्य है ।

आज शैक्षिक तकनीकी विज्ञान भारत में अनेक विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों के शिक्षक – प्रशिक्षण के पाठ्यक्रमों में समावेशित किया जा रहा है । हिमाचल , मेरठ , पंजाब , गढ़वाल , इन्दौर के विश्वविद्यालयों तथा रीजनल कॉलेज ऑफ एजूकेशन ने इस विषय को अपने पाठयक्रमों मे समावेशित करने में पहल की है ।

इस विषय की पुस्तकों के प्रणयन के सम्बन्ध में डॉ० रूहेला , डॉ० ए० आर० शर्मा , डॉ० ए० पी० शर्मा , डॉ० आर० ए० शर्मा , डॉ० एस० पी० कुलश्रेष्ठ , श्री सुरेश भटनागर , श्री गुलाटी तथा श्री एन० आर० स्वरूप सक्सेना का नाम स्वयं ही आ जाता है । इन लोगों ने ‘ शिक्षण तकनीकी ‘ पर लिखकर अध्यापकों तथा छात्राध्यापकों की जो सेवा की है , वह अविस्मरणीय है । बड़ौदा के डॉ० एम० एस० यादव तथा डॉ० गोविन्दा ने भी इस विषय पर पिटमैन की ‘ Aspects of Educational Technology ‘ के विभिन्न वॉल्यूम्स में आधिकारिक शोध – प्रपत्र प्रकाशित कराये हैं ।

By आलोक वर्मा

शैक्षिक तकनीकी का संक्षिप्त इतिहास। by आलोक वर्मा

शैक्षिक तकनीकी का संक्षिप्त इतिहास

( A BRIEF HISTORY OF EDUCATIONAL TECHNOLOGY )

शैक्षिक तकनीकी का इतिहास बहुत पुराना नहीं है । 19 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में औद्योगिक क्रान्ति के फलस्वरूप अनेक मशीनों का आविष्कार हुआ लेकिन शिक्षा की समस्त रूपरेखा सरल तथा सीमित ही रही । किन्तु बाद में धीरे – धीरे शिक्षा के क्षेत्र में भी परिवर्तन और प्रयोग होने लगे । शैक्षिक खिलौनों का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किया जाने लगा । सर्वप्रथम सन् 1926 ई० में अमेरिका के ओहियो ( Ohio ) के एक विश्वविद्यालय में सिडनी प्रेसी ( Sidney Pressey ) नामक व्यक्ति ने शिक्षण – मशीन ( Teaching Machine ) का प्रयोग शिक्षण के क्षेत्र में किया । लम्सडेन ( Lumsdain ) , ग्लेजर ( Glaser ) आदि व्यक्तियों ने सन् 1930 – 40 के मध्य विशिष्ट प्रकार की पुस्तकों , कार्डों और बोर्डों ( Scrambled Books , Cards & Boards ) का प्रयोग किया । फिर भी सन् 1900 से 1950 तक यह विज्ञान शिक्षा को विशेष प्रभावित नहीं कर सका । सन् 1950 में बी० एफ० स्किनर ( B . E . Skinner ) ने ‘ प्रोग्राम्ड लर्निंग ‘ ( Programmed Learning ) पद्धति का विकास किया । इसी वर्ष ब्राइनमोर ( Brynmor ) ने ‘ शैक्षिक तकनीकी ‘ शब्द का प्रयोग प्रथम बार किया । स्टेनली एडवर्ड ( Stanley Edward ) तथा स्किनर के प्रयासों के फलस्वरूप ‘ प्रोग्राम्ड लर्निंग मैटीरियल ‘ के प्रयोगों में विभिन्न राष्ट्रों में रुचि ली जाने लगी । फलस्वरूप तकनीकी स्वयं ही शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ने लगी और एक समय ऐसा आया कि ‘ प्रोग्राम्ड लर्निंग ‘ तथा ‘ श्रव्य – दृश्य – सामग्री को ही शैक्षिक तकनीकी का पर्याय माना जाने लगा । क्रमशः शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी उपकरणों के माध्यम से व्यवहार तकनीकी , अनुदेशन – तकनीकी तथा शिक्षण – तकनीकी आदि के क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के शिक्षण – प्रतिमानों ( Teaching Models ) आदि का प्रतिपादन होने लगा । इस प्रकार धीरे – धीरे शैक्षिक तकनीकी , शिक्षण प्रक्रिया को अधिक ठोस , व्यावहारिक एवं प्रभावपूर्ण बनाने में स्वयं को अधिक सक्षम रूप में प्रस्तुत करने में समर्थ होती गयी ।

By आलोक वर्मा

शैक्षिक तकनीकी का सम्प्रत्यय (विषय प्रवेश) by आलोक वर्मा

शैक्षिक तकनीकी का सम्प्रत्यय ( CONCEPT OF EDUCATIONAL TECHNOLOGY )

विषय – प्रवेश

आज के युग में मानव जीवन का प्रत्येक पक्ष वैज्ञानिक खोजों तथा आविष्कारों से प्रभावित है । शिक्षा का क्षेत्र भी इसके प्रभाव से मुक्त नहीं रह सका है । रेडियो , टेपरिकॉर्डर , टेलीविजन , रेडियो – विजन , लिंग्वाफोन , कम्प्यूटर आदि का बढ़ता हुआ उपयोग शिक्षा को तकनीकी ( Technology ) के निकट लाता जा रहा है । शिक्षाशास्त्र का कोई भी अंग , चाहे वह विधियों – प्रविधियों का हो , चाहे उद्देश्यों का हो , चाहे शिक्षण – प्रक्रिया का हो , चाहे शोध का हो , बिना तकनीकी के अपंग , अवश और लुंज महसूस होता है । छात्राध्यापकों की चाहे सैद्धान्तिक ज्ञान से सम्बन्धित समस्या हो , चाहे उनके प्रयोगात्मक शिक्षण ( Practice Teaching ) के क्षेत्र की अड़चन हो , तकनीकी हमें सहायता देती है । सत्य तो यह है कि तकनीकी विज्ञान इतना समृद्ध और शक्तिशाली होता जा रहा है कि बिना इसका अध्ययन किये छात्राध्यापकों का शिक्षण सम्बन्धी ज्ञान या उनके परीक्षण तथा प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और कौशल अधूरे समझे जाते हैं । शैक्षिक तकनीकी ( Educational Technology ) ने शिक्षा के क्षेत्र में पुरानी अवधारणाओं में आधुनिक सन्दर्भ के साथ अभूतपूर्व क्रान्तिकारी परिवर्तन कर उन्हें एक नवीन स्वरूप प्रदान किया है ।

सर्वप्रथम ‘ एजूकेशनल टेक्नॉलॉजी ‘ शब्द का प्रयोग इंग्लैण्ड में Brynmor Jones ने सन् 1967 में किया था । इसके पश्चात् इंग्लैण्ड की N . C . E . T . ( National Council of Educational Technolgy ) संस्था द्वारा आयोजित एक कॉफ्रेंस में इसकी व्याख्या की गयी । N . C . E . T . तथा अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने इतना और इस स्तर तक का कार्य प्रस्तुत किया कि 1967 में जन्मा यह विषय आज शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा – दर्शन , शिक्षा – मनोविज्ञान या शिक्षा – समाजशास्त्र के समकक्ष पहुँच चुका है । भारत के अनेक विश्वविद्यालयों ( हिमाचल , मेरठ , इन्दौर , गढ़वाल , आगरा , राजस्थान आदि ) ने इसे अपने बी० एड० तथा एम० एड० के पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय के रूप में रखा है । इस विषय की महत्ता तथा उपयोगिता को देखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद् ( N . C . E . R . T . ) , नई दिल्ली ने शैक्षिक तकनीकी केन्द्र ( Centre for Educational Technology ) प्रारम्भ कर दिया है , जहाँ पर शोध , प्रशिक्षण तथा निर्देशन की व्यवस्था की गई है ।

By आलोक वर्मा

NCF 2005 से सम्बंधित प्रश्न और उत्तर ( पूछे गए UPTET में ) by आलोक वर्मा

NCF 2005 से सम्बंधित प्रश्न और उत्तर ( पूछे गए UPTET में )

  1. ” अधिक गणित जानने की अपेक्षा यह जानना अधिक उपयोगी है कि गणितीयकरण कैसे जाए? “यह कथन …….. के द्वारा दिया जाता है ।

उत्तर डेविड हीलर ने यह कथन दिया कि आप का अपेक्षा यह जानना अधिक उपयोगी है कि गणितीयकरण कैसे किया जाए ।

  1. ” एनसीएफ , 2005 के अनुसार विद्यालयों में गणित शिक्षा का एक मुख्य उद्देश्य यह है

Ans : ( d ) NCF 2005 के अनुसार बच्चों की चिन्तन प्रक्रिया का गणितीयकरण करना , गणित शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है । NCF | 2015 अर्थात् National curriculum framework एन . सी . ई . आर . टी . द्वारा प्रकाशित चार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखाओं 1975 , 1988 , 2000 व 2005 में से एक है

  1. एन सी एफ , 2005 के अनुसार गणित की पाठाचा महत्वाकांक्षी , सुसंगत है और यह महत्वपूर्ण गणित ‘ पढ़ाती है । यहाँ महत्वकांक्षी का अर्थ है –

Ans : ( B ) NCF 2005 के अनुसार महत्वकांक्षी का अर्थ विद्यालय में गणित शिक्षण के उच्च उद्देश्यों को खोजना है ।

  1. अनिल सभी प्रश्नों के मौखिक उत्तर तो दे देता है परन्तु ,जब समस्याओं का हल लिखता है तो गलतियाँ करता है । उसके लेखन में गलतियों को हटाने हेतु निम्नलिखित में से कौन – सी उपचारात्मक विधि सर्वश्रेष्ठ है ?

Ans : ( c ) अनित प्रश्नों का मौखिक उत्तर देता है . परन्तु लिखित समस्या आ रही है इसका अर्थ है कि उसके आलेख को कुछ खाली स्थान करके उसे दिया जाये ताकि उसकी आंशिक समस्या का हल किया जाए ।

  1. . एक शिक्षिका शिक्षार्थियों से पत्तियों को एकत्र करने और सममिति पैटर्न की पहचान करने के लिए कहती है । यह कार्य शिक्षिका के . . . . . . . प्रयास को दर्शाता है ।

उत्तर :- एक शिक्षिका शिक्षार्थियों से पत्तियों को एकत्र करने और सममिति पैटर्न की पहचान करने के लिए कहती हैं । इस प्रकार शिक्षिका शिक्षार्थियों के वास्तविक जीवन को गणितीय अवधारणाओं से जोड़ने का प्रयास कर रही है ।

  1. . हमारी विद्यालयी पाठ्यचर्या में गणित शिक्षण के स्थान को सुनिश्चित करने के लिए युगल आधार – वाक्य है

Ans : गणित शिक्षण के स्थान को सुनिश्चित करने के लिए युगल आधार वाक्य ” किस प्रकार प्रत्यक शिक्षार्थी के मस्तिष्क – व्यस्त रखा जाए और किस प्रकार शिक्षार्थियों के संसाधनों को समय बनाया जाय ” हमारी विद्यालयी पाठ्यचर्या में शामिल है ।

  1. . एक शिक्षक शिक्षिका ने शिक्षार्थियों को पाँच देकर उन्हें जोड़कर बनने वाली सभी सम्मान पंचवर्गाकार आकृतियों की संख्या ज्ञात करने को कहा इसके उपरान्त छह वर्ग देकर उन्हें जोड़कर बनने वाली । सम्भव छह वर्गाकृतियों की संख्या ज्ञात करने को कहा । इसी तरह आगे बढ़ने को कहा । इस प्रकार की गतिविधियाँ शिक्षार्थी की सहायता करती हैं ।

Ans : इस प्रकार कि गतिविधि संख्या पैटर्न और आकृतियों के बीच सम्बन्धों की पहचान करने में सहायता करती है ।

  1. . एन सी एफ , 2005 के लक्ष्य कथन के अनुसार विद्यालयी गणित उस स्थिति में नहीं होता , जहाँ बच्चे सूत्रों व एल्गोरिदम को कण्ठस्थ करे।

Ans : ( d ) NCF 2005 के अनुसार “ विद्यालयी गणित उस स्थिति में नहीं होता जहाँ बच्चे सूत्रों व एल्गोरिदम को कण्ठस्थ करें ।

  1. ” . ‘ जियोजेब्रा ‘ सॉफ्टवेयर की सहायता से शिक्षार्थी . . . . के द्वारा ज्यामिति की सभी अवधारणाओं को सीख सकते हैं ।

Ans : ( a ) जिआजेब्रा ज्यामिति , बीजगणित तथा कैलकुलस सिखान का सॉफ्टवेयर है । यह एक इंटरैक्टिव प्रोग्राम है जो विद्यार्थिया । खोज परक उपागम का निर्माण करते हैं ।

  1. . विद्यालय स्तर पर गणित में शिक्षार्थियों की असफलता पार का एक मुख्य कारण यह है कि हमारी आकलन प्रक्रिया ।

Ans : विद्यालय स्तर पर गणित में शिक्षार्थियों की असफलता का एक मुख्य कारण यह है कि हमारी आकलन प्रक्रिया योग्यता के गणितीयकरण की अपेक्षा प्रक्रमण सम्बन्धी ज्ञान के परीक्षण पर बल देती है ।

By आलोक वर्मा

गणित शिक्षा-शास्त्र

इकाईः1 गणित शिक्षण के आधार
1. गणित का अर्थ

  • गणित का अर्थ एवं परिभाषा
  • गणित की प्रकृति
  • गणित की संरचना
  • गणित शिक्षण के मूल्य

2. गणित का इतिहास एवं गणितज्ञ

  • प्रस्तावना, गणित का इतिहास
  • आदिकाल(500ई. पूर्व तक)
  • पूर्व मध्यकाल(500ई. से 400ई. पूर्व तक)
  • मध्यकाल या स्वर्णयुग(400ई. से 1200ई तक)
  • उत्तर मध्यकाल(1200ई. से 1800ई. तक)
  • वर्तमान आधुनिक काल(1800ई. के पश्चात)
  • प्रमुख गणितज्ञों का परिचय एवं उनका गणित में योगदान
  • आर्यभट्ट प्रथम
  • श्रीनिवास रामानुजम
  • भास्कराचार्य द्वितीय
  • ब्रह्मगुप्त
  • यूक्लिड
  • पाइथागोरस

इकाईः2
3. गणित शिक्षण के उद्देश्य एवं प्राप्य उद्देश्य

  • प्रस्तावना
  • शैक्षिक उद्देश्यों का अर्थ एवं परिभाषाएँ
  • उद्देश्यों की आवश्यकता
  • उद्देश्यों के निर्धारण के लाभ
  • उद्देश्यों के चुनाव के नियम
  • गणित शिक्षण के उद्देश्य
  • उद्देश्यों की प्राप्ति में गणित अध्यापक की भूमिका
  • गणित शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
  • प्राप्य उद्देश्य का अर्थ
  • उद्देश्यों के प्रकार
  • शैक्षिक एवं शिक्षण उद्देश्यों में अन्तर
  • उद्देश्य एवं प्राप्य उद्देश्य में अन्तर
  • लक्ष्य, ध्येय, उद्दश्यों तथा विशिष्ट उद्देश्यों में सम्बन्ध
  • शिक्षण उद्देश्यों का वर्गीकरण
  • उद्देश्यों की व्यावहारिक रूप में लिखने की आवश्यकता एवं महत्व
  • शिक्षण के ज्ञानात्मक, भावात्मक एवं क्रियात्मक पक्ष
  • शिक्षण के व्यावहारिक उद्देश्य लिखने की विधियाँ
  • रोबर्ट मेगर विधि
  • रोबर्ट मेगर विधि की सीमाएँ
  • क्षेत्रीय महाविद्यालय के अनुसार उद्देश्यों का वर्गीकरण
  • आर.सी.ई.एम. विधि की विशेषताएं एवं सीमाएँ
  • मिलर विधि
  • ब्लूम के वर्गीकरण की आलोचना

4. गणित में सहसम्बन्ध

  • सह-सम्बन्ध का अर्थ
  • परिभाषाएं
  • सह-सम्बन्ध के प्रकार
  • गणित की विभिन्न शाखाओं में सह-सम्बन्ध
  • गणित का अन्य विषयों से सह-सम्बन्ध
  • गणित शिक्षण में सह-सम्बन्ध की आवश्यकता

5. गणित का पाठ्यक्रम

  • प्रस्तावना
  • पाठ्यक्रम का अर्थ
  • परिभाषाएं
  • पाठ्यक्रम की विशेषताएं
  • पाठ्यक्रम के दोष
  • पाठ्यक्रम में दोषों को दूर करने के लिए सुझाव
  • पाठ्यक्रम की प्रक्रिया
  • पाठ्यक्रम के उद्देश्य
  • पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धान्त
  • पाठ्यक्रम संगठन को प्रभावित करने वाले कारक
  • पाठ्यक्रम के विकास की अवस्थाएं

इकाईः3
6. गणित शिक्षण की विधियाँ

  • प्रस्तावना
  • शिक्षण विधि का अर्थ एवं परिभाषाएँ
  • प्रविधियाँ
  • शिक्षण विधि व प्रविधि में अन्तर
  • शिक्षण विधियों का महत्व
  • गणित शिक्षण विधि की आवश्यकता
  • शिक्षण विधियों को प्रभावित करने वाले कारक
  • गणित शिक्षण की विधियाँ(शिक्षक व बाल केन्द्रित विधियाँ)
  • व्याख्यान-प्रदर्शन विधि
  • परियोजना विधि
  • आगमन विधि
  • निगमन विधि
  • आगमन एवं निगमन विधि में सम्बन्ध
  • आगमन व निगमन विधि में अन्तर

7. गणित का अध्यापक एवं व्यावसायिक विकास

  • प्रस्तावना
  • परिभाषाएँ
  • गणित अध्यापकों के गुण एवं विशेषताएँ
  • गणित अध्यापकों के गुणों का वर्गीकरण(व्यक्तिगत गुण, व्यावसायिक गुण, सामाजिक गुण)
  • गणित अध्यापक के कर्तव्य
  • विद्यालय की प्रतिष्ठा सुधारने में गणित में गणित अध्यापक की भूमिका
  • कक्षा में जाने से पूर्व गणित अध्यापक की तैयारी

इकाईः4
8. गणित की पाठ्य-पुस्तक

  • प्रस्तावना
  • पाठ्य-पुस्तक का अर्थ
  • परिभाषाएँ
  • गणित पाठ्य-पुस्तक की आवश्यकता
  • गणित पाठ्य-पुस्तक की उपयोगिता
  • गणित पाठ्य-पुस्तक की विशेषताएँ
  • पाठ्य-पुस्तक के दोष
  • गणित पाठ्य-पुस्तक की सीमाएँ
  • पाठ्य-पुस्तक का मूल्यांकन

9. गणित में पाठ्य-सहगामी क्रियाएँ

  • प्रस्तावना
  • पाठ्य सहगामी क्रियाओं का अर्थ
  • पाठ्य सहगामी क्रियाओं का महत्व
  • पाठ्य सहगामी क्रियाओं के उद्देश्य
  • पाठ्य सहगामी क्रियाओं के गुण
  • पाठ्य सहगामह क्रियाओं का गठन
  • कुछ पाठ्य सहगामी क्रियाएँ-गणितीय शैक्षिक भ्रमण
  • गणितीय प्रयोगशाला
  • गणितीय पुस्तकालय
  • गणितीय परिषद्
  • गणितीय संग्रहालय
  • गणितीय मेले व प्रदर्शनियाँ

10. गणित में श्रव्य-दृश्य सामग्री

  • प्रस्तावना
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री का अर्थ
  • परिभाषाएँ
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री के मुख्य कार्य एवं महत्व
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री का चयन
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री के प्रयोग में सावधानियाँ
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री का वर्गीकरण
  • शिक्षण सहायक सामग्री की सापेक्षिक प्रभावशीलता
  • श्रव्य सामग्री
  • दृश्य सामग्री
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री

इकाईः5
11. गणित में मूल्यांकन एवं मापन

  • प्रस्तावना
  • मूल्यांकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ
  • मूल्यांकन के उद्देश्य
  • मूल्यांकन आवश्यकता
  • मूल्यांकन का महत्व
  • मूल्यांकन की प्रक्रिया
  • मूल्यांकन का क्षेत्र
  • मापन, मापन की परिभाषाएँ, मापन की विशेषताएँ, मापन की सीमाएं, माप के तत्व
  • मापन और मूल्यांकन में अन्तर
  • परीक्षा एवं मूल्यांकन में अन्तर

12. सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन

  • प्रस्तावना
  • मूल्यांकन के अंग
  • सतत् मूल्यांकन का महत्व
  • मूल्यांकन के क्षेत्र
  • सतत् मूल्यांकन का आयोजन
  • सतत् मूल्यांकन की कार्यप्रणाली तथा सोपान
  • व्यापक मूल्यांकन
  • दैनिक मूल्यांकन
  • साप्ताहिक मूल्यांकन
  • षट्मासिक मूल्यांकन
  • वार्षिक मूल्यांकन
  • मूल्यांकन के प्रकार
  • योगात्मक मूल्यांकन
  • संरचनात्मक मूल्यांकन
  • संरचनात्मक मूल्यांकन एवं योगात्मक मूल्यांकन में अन्तर

13. परीक्षण पत्र

  • प्रस्तवना
  • परिभाषाएँ
  • अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ
  • परीक्षणों के प्रकार
  • वस्तुनिष्ठ परीक्षा की निर्माण विधि
  • वस्तुनिष्ठ परीक्षणों के दोष
  • सावधानियाँ
  • लघु उत्तरात्मक प्रश्न निबन्धात्मक परीक्षाओं के प्रकार
  • निबन्धात्मक परीक्षाओं के गुण
  • निबन्धात्मक परीक्षाओं के दोष/सीमाएँ
  • निबन्धात्मक परीक्षाओं में सुधार हेतु सुझाव
  • निबन्धात्मक तथा वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में अन्तर

14. निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण

  • प्रस्तावना
  • निदानात्मक परीक्षण
  • परिभाषाएँ
  • नैदानिक परीक्षणों के उद्देश्य
  • निदानात्मक परीक्षणों की विशेषताएँ
  • निदानात्मक परीक्षणों की आवश्यकता एवं महत्व
  • निदानात्मक परीक्षणों का निर्माण
  • शैक्षिक निदान के स्तर
  • निदानात्मक परीक्षणों के निर्माण मे सावधानियाँ
  • विद्यार्थीयों के समस्याओं के सम्भावित प्रश्न
  • उपचारात्मक शिक्षण
  • मन्द बुद्धि विद्यार्थीयों के लिए उपचारात्मक शिक्षण
  • प्रखर बुद्धि विद्यार्थीयों के लिए उपचारात्मक शिक्षण

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“NCF 2005” राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005  (NCF) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर by आलोक वर्मा

NCF 2005 Important Questions in Hindi

National curriculum framework 2005 (NCF 2005 Important Questions in Hindi ) के सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर का अध्यन करेंगे राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 (NCF) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर को भी शामिल किया है, जो कि पिछली परीक्षाओं में पूछे गए थे ,मुझे लगता है कि आप लोगो के लिए बहुत ही उपयोगी रहेगा ।

“पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर”

प्रश्न1 NCF 2005 में गुणवत्ता आयाम शीर्षक के अंतर्गत महत्व दिया गया है?
उत्तर- बालकों के लिए संरचित अनुभव एवं पाठ्यक्रम सुधार को

प्रश्न2 NCF 2005 का प्रारंभ रविंद्र नाथ टैगोर के किस निबंध से होती है?
उत्तर- सभ्यता और प्रगति

प्रश्न3 NCF 2005 मैं बल दिया गया है?
उत्तर- शांति के लिए शिक्षा

प्रश्न4 सामाजिक अध्ययन शिक्षण का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम कब बनाया गया?
उत्तर- 2005 में

प्रश्न4 यशपाल शर्मा समिति में कुल कितने सदस्य थे?
उत्तर- 38

प्रश्न5 पाठ्यक्रम निर्माण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर- शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु

प्रश्न6 NCF 2005 का भाषा फॉर्मूला है?
उत्तर- त्रिभाषायी फार्मूला

प्रश्न7 प्रथम भाषा,द्वितीय भाषा एवं तृतीय भाषा है?
उत्तर- क्रमशः प्रथम- हिंदी( राष्ट्रीय भाषा/ राज्य की भाषा), द्वितीय- अंग्रेजी( अंतरराष्ट्रीय भाषा), तृतीय- स्थानीय भाषा( पंजाबी, संस्कृत, तमिल)

प्रश्न8 विद्यालय शिक्षा का अब तक का नवीनतम राष्ट्रीय दस्तावेज है?
उत्तर- NCF 2005

प्रश्न9 इस मंत्रालय की पहल परNCF 2005 तैयार किया गया था?
उत्तर- मानव संसाधन विकास मंत्रालय

प्रश्न10 किसकी अध्यक्षता में विद्वानों ने NCF 2005 तैयार किया?
उत्तर- प्रोफेसर यशपाल

प्रश्न11 NCF 2005 का प्रमुख सूत्र है?
उत्तर- (Learning Without Burdon)बिना भार के अधिगम

प्रश्न12 NCF 2005 मी सुझाव दिया गया है कि सूचना को क्या माननीय से बचा जाए?
उत्तर- ज्ञान

प्रश्न13 NCF 2005 के अनुसार बच्चों की गलतियां क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर- यह समाधान को पहचानने में सहायता करती है

प्रश्न14 ” शिक्षा बिना बोझ के” जोNCF 2005 का प्रमुख स्रोत है इसका अर्थ होता है?
उत्तर- पाठ्यचर्या के बोझ को कम करना

प्रश्न15 NCF 2005 सिफारिश करता है कि प्राथमिक स्तर पर गणित की शिक्षा का केंद्र होना चाहिए?
उत्तर- कक्षा में पढ़ाई गए टॉपिक्स को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़ना

प्रश्न16 NCF 2005 में गणित शिक्षण के बारे में बताया गया है कि” गणित शिक्षण महत्वाकांक्षी ,सुगमता और महत्वपूर्ण होना चाहिए” यहां महत्वाकांक्षी का मतलब क्या है?
उत्तर- गणित के उच्च उद्देश्य( लक्ष्य) की प्राप्ति

प्रश्न17 NCF 2005 मे ” गणित की लंबी आकृति” का मतलब है?
उत्तर- एकता संकल्पना पर दूसरी संकल्पना बनाना

प्रश्न18 NCF 2005 में कला शिक्षा को विद्यालय में जोड़ने का उद्देश्य है?
उत्तर- सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा करना एवं छात्रों के व्यक्तित्व और मानसिक स्वास्थ्य को विकसित करना

प्रश्न19 NCF 2005 के अनुसार सीखना है?
उत्तर- मानसिक विकास, शिल्प कला केंद्र एवं व्यावसायिक ज्ञान

प्रश्न20 NCF 2005 मैं किस परीक्षा के संबंध में सुधार के लिए सुझाव दिए गए थे?
उत्तर- कक्षा दसवीं की परीक्षा ऐच्छिक हो

प्रश्न21 NCF 2005 बल देती है?
उत्तर- करके सीखने पर

प्रश्न22 NCF 2005 मैं सामाजिक अध्ययन मे कौन से मुद्दों को शामिल करने की अनुशंसा की गई थी?
उत्तर- सभी स्तर के विद्यार्थियों के लैंगिक एवं स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे

प्रश्न23 NCF 2005 की कार्यशाला कहां पर आयोजित की गई?
उत्तर- NCERT नई दिल्ली

प्रश्न24 NCF 2005 का मुख्य सूत्र “शिक्षा बिना बोझ के” कब आए हुआ विचार था?
उत्तर- 1993 ई. में

प्रश्न25 NCF 2005 के अंतर्गत परीक्षा सुधारों में कि सुधार को सुझाया गया है?
उत्तर- सामूहिक कार्य मूल्यांकन, सतत मूल्यांकन, खुली पुस्तक की परीक्षा मूल्यांकन

प्रश्न26 NCF 2005 में बताया गया है?
उत्तर- सपनों के भारत को धरातल पर उतारने की युक्ति

प्रश्न27 NCF 2005 के अध्याय “विद्यालय एवं कक्षा का वातावरण” में बताया गया है?
उत्तर- वातावरण के भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक आयाम अधिगम को कैसे प्रभावित करते हैं

प्रश्न28 करिकुलम किस भाषा का शब्द है?
उत्तर- लेटिन भाषा का

प्रश्न29 NCF 2005 में किन शिक्षण सूत्रों के अधिकतम प्रयोग का सुझाव दिया है?
उत्तर- ज्ञात से अज्ञात की ओर एवं मूर्त से अमूर्त की ओर

प्रश्न30 NCF 2005 के अनुसार मार्गदर्शक सिद्धांत में निहितार्थ है?
उत्तर- ज्ञान को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ना
दोस्तो इस पोस्ट मे हमने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005 Important Questions in Hindi ) पर आधारित प्रश्न उत्तर आप के सामने लाया हूँ जो कि सभी शिक्षक भर्ती परीक्षाओ मे पूछे जा सकते है मुझे लगता है, यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी! ऐसे ही कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स की तैयारी के लिए हमारी वेबसाइट को लॉगिन करते रहे।

By आलोक वर्मा

फलो के नाम एवं वनस्पतिक नाम

फलो के नाम एवं वनस्पतिक नाम

  • अंगूर- वायटिस विनीफेरा
  • अनार- प्रनिका ग्रेनेटम
  • अमरूद- साइडियम ग्वाजावा
  • अरंडी- रिसिनिस काम्युनिस
  • अरहर।- कैलेनस कजान
  • आम- मेन्जीफेरा इंडिका
  • आलू- सोलेनम ट्यूबरोसम।
  • इमली- टैमारिंडस इंडिका
  • उरद- विग्ना मुंगो
  • कपास- गोसीपियम हरबेसियम
  • कमल– मेलमबियम स्पीशियोसम
  • करेला- मिमोर्डिया करंशिया
  • काजू- एनाकार्डियम औसीडेन्टेल
  • कुसुम- कार्थेमस टिक्टोरियस
  • केला- मूसा पैराडीसियाका
  • खजूर- फोइनिक्स डेक्टाइलीफेरा
  • नाशपाती- पाइरस कम्यूनिस
  • नींबू- सिट्रस ओरेन्टीफोलिया
  • पपीता- कैरिका पपाया
  • प्याज- एलियम सैपा
  • फूलगोभी- ब्रेसिका ओलेरेसिका
  • बंदगोभी- ब्रेसिका ओलेरेसिया
  • बाजरा- पैनीसिटम टाइफौइड्स
  • बैगन- सोलेनम मेलोन्जीना
  • भिण्डी- एबरमासकस एस्कुलेन्टस
  • मक्का- जिया मेज
  • मटर- पाइजम सेटाइवम
  • मसूर- लेन्स कुलीनेरिस
  • मिर्च- कैप्सिकम एनम
  • मूली- रेकेनस सैटाइवस
  • मूंग- विग्ना रैडिएटा
  • मूंगफली- एराकिस हाइपोजिया
  • खीरा- कुकूमिस मीलो
  • गन्ना- सैकेरम ऑफिीसिनेरम
  • गाजर- डौकस कैरोटा
  • गेंहू- ट्रिटीकम एस्टीवम
  • गांठगोभी- ब्रेसिका ओलेरेसिका
  • चना- साइसर एरीटिनम
  • जौ- हॉर्डियम वल्गेयर
  • ज्वार- सौरघम वल्गेयर
  • टमाटर – लाइकोपर्सिकम एस्कुलेन्टम
  • तम्बाकू- निकोटियाना टोबेकम
  • धान- ओराइजा सेटाइवा
  • नारियल- कोकोज न्यूसीफेरा
  • लहसुन- एलियम सटाइवा
  • लीची- साइनेनसिस लीची
  • लीबिया- विग्ना अनग्यूकुलेटा
  • शकरकन्द- आइपोमिया बटाटा
  • शलजम- ब्रेसिका रापा
  • शहतूत- मोरस इंडिका
  • पाइरस- मैलस डौलीकम लवलव
  • संतरा- सिट्रस साइनेन्सिस
  • सरसों- ब्रेसिका कैम्पेस्ट्रिम
  • सूरजमुखी- हैलिएन्थस एनस
  • सेब- पाइरस मैलस
  • सेम- डौलीकम लवलव
  • सोयाबीन- ग्लाइसीन मैक्स ।

By आलोक वर्मा